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PMKVY

What is PMKVY?

Approved for another four years (2016-2020) to benefit 10 million youth. Allocated Budget 12,000 Crores
Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) is the flagship scheme of the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship (MSDE). The objective of this Skill Certification Scheme is to enable a large number of Indian youth to take up industry-relevant skill training that will help them in securing a better livelihood. Individuals with prior learning experience or skills will also be assessed and certified under Recognition of Prior Learning (RPL).
The aim of the scheme is to encourage aptitude towards employable skills and to increase working efficiency of probable and existing daily wage earners, by giving monetary awards and rewards and by providing quality training to them. Average award amount per person has been kept as 8,000 (US $120). Those wage earners already possessing a standard level of skill will be given recognition as per scheme and average award amount for them is 2000 to 2500. In the initial year, a target to distribute 15 billion (US $220 million) has been laid down for the scheme.
Training programmes have been worked out on the basis of National Occupational Standards (NOS) and qualification packs specifically developed in various sectors of skills. For this qualification plans and quality plans have been developed by various Sector Skill Councils (SSC) created with participation of Industries. National Skill Development Council (NSDC) has been made coordinating and driving agency for the same.

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DCA in Hindi

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DCA in Nepali  

HINDI : हिंदी

हिन्दी विश्व में बोली जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी भाषा है । इसके साथ ही हमारे संविधान में इसे राजभाषा का दर्जा दिया गया है । अतएव भारत सरकार के सभी कार्यालय में पूरा पूरा काम करने का लक्ष्य हिन्दी में रखा गया है । इसकी नियमित पर्यवेक्षन के लिए संसदीय राजभाषा समिति तथा भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग है जो हिन्दी के प्रयोग प्रसार के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य करती है ।

मेट्रिक / इंटर स्तर पर / स्नातक स्तर पर

स्नातकोत्तर स्तर पर : (विदेशों में ) भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है | विश्व के लगभग सभी देशों से भारत के व्यवसायिक संबंध बन रहे है | ऐसे में उन सभी देशों के व्यावसायी , पत्रकार आदि हमारे देश में आते ही रहते है | इस कारण उन देशों में हिंदी सीखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और उतनी ही तेजी से बढ़ रही है हिंदी सिखाने वालों की माँग | आज विश्व की लगभग सभी विख्यात विश्वविद्यालयों में हिंदी पढाई जाती है | वर्तमान में हिंदी प्रशिक्षकों की सबसे ज्यादा माँग चीन, कोरिया, मध्यपूर्व तथा यूरोपीय देशों में है | वेतन विदेशी मुद्रा में |

केन्द्रीय सरकार में : मुख्यत: लिपिकीय स्तर के पद , हिंदी एक पेपर के रूप में उपलब्ध अनुवादक, दुभाषिया ( इंटरप्रेटर ) , राजभाषा अधिकारी, केन्द्रीय तथा नवोदय, विद्यालयों, आर्मी स्कूल, मिलटरी स्कूल, नौसेना तथा वायुसेना के विद्यालयों में शिक्षण इत्यादि | भारतीय प्रशासनिक सेवा में परीक्षाओं में हिंदी माध्यम तथा वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध | सफलता दर 65 % | हिंदी साहित्य द्वितीय सबसे ज्यादा पसंदीदा विषय ( प्रथम तमिल साहित्य )

राज्य सरकारों में : हिंदी भाषी एवं हिंदीतर भाषी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारी या सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में शिक्षण का कार्य | हिंदी भाषी राज्यों की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हिंदी एक विषय के रूप में उपलब्ध | हिंदी भाषी राज्यों की प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में हिंदी माध्यम तथा वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध | हिंदी माध्यम तथा वैकल्पिक विषय के रूप में लेकर परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की सफलता दर काफी ज्यादा |

निजी संस्थानों में : सबसे बड़ा बाज़ार विज्ञापन निर्माता एजेंसियाँ एवं फिल्म एवं टेलिविज़न मनोरंजन उद्योग है | योग्य एवं भाषा की सही पकड़ रखने वाले लोगों के लिए आय की कोई सीमा नहीं है |साथ ही समाचार माध्यमों में भी अनगणित अवसर उपलब्ध है | इसके लिए आपको कुछ अतिरिक्त योग्यताएँ अर्जित करनी होगी | निजी स्कूलों में शिक्षण का कार्य जिनमें वेतनमान लगभग सरकारी स्कूलों जैसा ही होता है | निजी स्कूल / कालेजों में भी हिंदी के शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की भारी माँग है | ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे स्वयं सेवी संस्थाओं ( एन जी ओ ) में भी काफी अवसर उपलब्ध है |

स्नातकोत्तर स्तर पर : ( केन्द्र सरकार ) केन्द्रीय विश्वविद्यायों , हिंदी शिक्षण योजना , केन्द्रीय हिंदी संस्थान तथा इग्नो जैसी संस्थाओं में भी हिंदी प्राध्यापकों की काफी माँग है | मुख्य रूप से कालेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षण का काम | इसके लिए आपको नेट / स्लेट जैसी परीक्षाएँ अतिरिक्त तौर पर पास करनी पडेंगी | सहायक निदेशक ( राजभाषा ), हिंदी अधिकारी, अनुसंधान अधिकारी , सहायक निदेशक ( अनुवाद ), सहायक निदेशक (प्रशिक्षण ), सहायक निदेशक ( कार्यान्वयन ), सहायक निदेशक ( तकनीकि ), इत्यादि पदों पर सीधे नियुक्ती तथा निदेशक के पद पदोन्नति के अवसर |

राष्ट्रीय स्तर पर : भारतीय संसद में आपको दुभाषिए / अनुवादक का काम मिल सकता है जो काफी रसूख वाला काम माना जाता है | इसके लिए आपको दो तीन भाषाओं पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए | साथ ही अच्छे अनुवादक के गुण होने चाहिए | मिलटरी इंटेलीजेन्स , इंटेलीजेन्स ब्यूरो , रॉ इत्यादि संघटनों में भी भाषा पर पकड़ रखने वाले लोगों की काफी माँग है | जूनियर इंटेलीजेन्स अधिकारी, साइफर्स, फिल्ड इंटेलीजेन्स अधकारी , टेलीकाम अधिकारी इत्यादि पदों पर युक युवतियों केलिए काफी अवसर है |

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